मैथिली विकास कोष

स्थापनाक औचित्य

जिल्ला विकास समिति, नेपाल सरकारक स्थानीय ऐन अनुसार जिल्ला सरकारक रुपमे कार्य करबाक हेतु स्थापित निकाय छल । मुख्यतः विकास निमार्ण कार्यक नेतृत्वदायी भूमिकासंगे ऐनक प्राव्धान अनुसार स्थानीय भाषाक संरक्षण, सम्बर्धन आ प्रयोगक अधिकार सेहो प्रदत छलै । नेपालमे भाषिक अधिकारक स्वर घनीभूत भ’ रहल अवस्था छलै । जाहिक्रममे काठमाण्डौं नगरपालिका अपन कामकाजक भाषाक रुपमे नेपाल भाषाके मान्यता देने छलै । जिल्ला विकास समिति धनुषामे सेहो एहि विषयमे बहश प्रारम्भ भेलै आ अन्ततः जिबिस धनुषाक बोर्डक निर्णय पश्चात परिषद बैठकद्वारा एहि जिल्लाक अधिंकाश नागरिकक भाषा मैथिलीकेँ जिल्ला भाषाक रुपमे मान्यताकसंगे आमजनताद्वारा नेपाली भाषासंगे मैथिली भाषाक प्रयोगकेँ मान्यताक प्रस्ताव सर्वसम्मत पारीत कएल गेलै । एहि प्रभावसँ जनकपुर नगरपालिका आ राजविराज नगरपालिका मैथिली भाषाकेँ आ किर्तीपुर नगरपालिका नेपाल भाषाकेँ मान्यता प्रदान कएने छल । नेपालक मातृभाषी सभमे एकप्रकार सकारात्मक प्रभाव प्रक्षेपण भेल छलै । मुदा कानून प्रदत एहि अधिकारक प्रयोगक विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालयमे रोक लगएबाक याचिका दायर कएल गेल, सर्वाेच्च अदालत आदेश देलकै जे तात्काल एहि भाषा सभक प्रयोग बन्द कएल जाए । जिल्ला विकास समिति धनुषा आ काठमाण्डौं नगरपालिका मात्र एहि मुद्दाकेँ निरन्तर लडैत रहल । जिबिस धनुषाक वारेसक रुपमे रमेश रञ्जन अधिकृत नियुक्त कएल गेल छलाह । सर्वाेच्चक निर्णयसँ स्थानीय सरकारद्वारा कएल गेल निर्णय बदर भेलै आ कानूनी अधिकार प्रयोगपर प्रतिवन्ध लगा देल गेलै । एखनोधरि नेपालक मातृभाषी लोकनि ओहिदिनकेँ काला दिनक रुपमे विरोध प्रर्दशन करैत आबिरहल अछि ।

 जिल्ला विकास समिति धनुषा तहिएसँ भाषाक बिषयमे गम्भिर मन्थनमे लागि गेल । संस्था स्थापनाक माध्यमसँ भाषिक अधिकारक आन्दोलनकेँ निरन्तरता देबाक निष्कर्षपर पहुँचल । एकटा वैधानिक संस्थाक स्थापनाक प्रयत्न आगू बढल ।

sलीडर

मैथिली विकास कोषक स्थापना

तात्कालीन जिल्ला विकास समितिक बोर्ड मैथिली भाषा, साहित्य, संस्कृतिक उत्थान, सम्बर्धन आ प्रर्वधनकसंग भाषिक अधिकारक हेतु प्रयत्नशील आ सङ्घर्षशील एकटा संस्था परिकल्पना क’ साकार रुप देबाक कार्य आगू बढ़ौलक । संस्थाक मूर्तरुप देबाक हेतु तत्कालीन जिविस सभापति रामचरित्र साहक सभापतित्वमे भेल बैसारमे तत्कालीन जिविस बोर्ड सदस्य रमेश रञ्जनके संयोजकत्वमे एकटा समिति निमार्ण कएल गेल । जाहिमे बोर्ड सदस्यद्वय मोहन यादव आ शत्रुध्न महतो सदस्य बनाओल गेलाह । वैधानिक सरकारी संस्थाद्वारा गैर सरकारी संस्था निमार्णक परम्परा विगतमे नहि छल । कोनो सरकारी जनप्रतिनिधि मूलक संस्था स्वयं गैरसरकारी संस्थाक स्थापना करए तकर औचित्य पुष्टि करब कठिन छल । तें सम्भाव्यता अध्ययन, श्रोत व्यवस्थापन आ कानूनी प्राव्धान सहितक अध्ययनक हेतु एकटा कार्यदल बनाओल गेल । कार्यदलकेँ विधान निमार्णक जिम्मेवारी देल गेल । विधान जिल्ला विकास समितिक बैसारसँ पारित कएल गेल । कार्यसमिति सेहो बनाओल गेल आ ओही समतिक नेतृत्वमे संस्था दर्ता करबाक प्रक्रिया आगु बढ़ाओल गेल । साहित्यकार डा. राजेन्द्र प्रसाद विमलके संयोकत्वमे एकगोट कार्यसमिति चयन कएल गेल । जाहिमे रमेश रञ्जनके सदस्य सचिव आ क्रमशः रामचरित्र साह, डा. रामावतार यादव, रामभरोस कापडि़ ‘ भ्रमर ’, रोशन जनकपुरी, सुनिल मल्लिक सदस्य चयन कएल गेलाह । मैथिली विकास कोष नामक संस्था जिबिस धनुषाद्वारा बिक्रम सम्बत २०५८ ।०३। २१ ईस्वी सम्बत ५ जुलाई २००१ केँ विधिवत जिल्ला प्रशासन कार्यालय धनुषामे दर्ता भेल ।  जिविस धनुषामे कार्यालय राखि विधान आ उदेश्य अनुसार कार्य सञ्चालन प्रारम्भ कएल गेल ।

कोषक उदेश्य

मैथिली भाषा, साहित्य, संस्कृतिक उन्नयन, संरक्षण, प्रर्वधन ।

मैथिली वाङ्मय, ईतिहास, पुरातत्व, लोककला, लोकनायकसभपर अनुसन्धान, प्रकाशन आ प्रशारणक हेतु सामग्री निमार्ण ।

मैथिली नाटक, गीत, सङ्गीत, नृत्य, तथा अन्य प्रर्दशनकारी कलाक संरक्षण, प्रर्वधन ।

भाषिक सम्वैधानिक अधिकार, मिथिलाक भूगोल, ईतिहास आ लोकपरम्पराक रक्षाक हेतु सतत् प्रयत्नशील ।

शुभकामना

राम चरित्र साह

संयोजक (संरक्षक समिति)

मैथिली विकास कोषक स्थापना २०५८ सालमे भेल छल । मैथिली भाषा, आ साहित्यक विकास संरक्षण, संवर्धन आ समृद्धिक पुनित उदेश्यसँ जिल्ला विकास समिति धनुषाक तत्कालीन सभापति हम रामचरित्र साह आ अन्य पदाधिकारी लोकनिक सकृयता एवं अग्रसरतामे ई पुनित काज सम्भव भेल छल । जिल्ला विकास समिति धनुषा द्धारा प्रस्तावित “ मैथिली विकास कोषक ” स्थापनाक सुन्दरतम् कार्यक अनुमोदन जिल्ला परिषद धनुषा सर्वसम्मतिस कएने छल । जिल्ला विकास समिति धनुषा आ १०१ गाउँ विकास समिति द्वारा कोष के आर्थिक सहयोग उपलब्ध करौने छल । आ ओहि रकम के अक्षय कोषक रुपमे स्थापित क’ कार्य प्रारम्भ भेल छल । कोष के सहि दिशा निर्देश करबाक हेतु स्थानिय निकाय द्वारा पारीत आ नेपाल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अपन विधान सेहो निर्माण कएल गेल छल । एहि विधान मे विशेषाधिकार प्राप्त एकटा संरक्षक समितिक परिकल्पना कएल गेल छल । संरक्षक समितिक स्थायी सदस्य तत्कालीन सभापति श्री राम चरित्र साह आ श्री रमेश रंजन झा सर्वसम्मतिसँ चयन कयल गेल छलाह । कोषक उदेश्य अनुरुप कार्य सम्पदान हेतु तदर्थ समिति गठन कयल गेल छल । एहि समितिक अध्यक्ष मैथिली भाषा आ साहित्यक वरीष्ठ साहित्यकार डा. राजेन्द्र प्रसाद विमलजी छलाह त सदस्य सचिवमे मैथिलीक साहित्यकार, अभिनेता तथा तत्कालीन जिविस धनुषाक ईलाका सदस्य श्री रमेश रंजन झा सर्वसम्मती सँ चयन कयल गेल छलाह । पहिल कार्यसमितिमे भाषा वैज्ञानिक प्रा.डा.रामावतार यादव , मैथिली भाषा आ साहित्यक अनुरागी कवि आ लेखक श्री राम भरोस कापडी (भ्रमर) , श्री रोशन जनकपुरी , श्री सुनील मल्लिक सदृश्यक व्यक्तित्वलोकनि चयन भेल छलाह । स्थापना कालसँ यी संस्था अपन उदेश्य अनुरुप फलदायी परिणामक अग्रसारित कार्य सुसम्पन्न करैत आएल अछि । आ कोषक वर्तमान अध्यक्ष मैथिली भाषा आ साहित्यक अनुरागी÷अभियानि श्री जीवनाथ चौधरीके कुशल नेतृत्वमे मैथिली भाषा आ साहित्यक क्षेत्रमे राष्ट्रिय एवं अन्र्तराष्ट्रिय जगतमे सेहो ई संस्था उच्च स्थान प्राप्त कइने अछि । कोषक वर्तमान कार्यसमिति संस्थाक विगत, वर्तमान आ भविष्यके परिकल्पनासहित वेभ साइट निर्माण करबाक निर्णय कएलक अछि जे सराहनीय अछि । एहिसँ मैथिली भाषा आ साहित्य अनुरागी लोकनि के मनोकामना पुरा होएत आ फलदायी योगदान होएत से हमर अटल विश्वास एवं शुभकामना । धन्यवाद ।

डा. राजेन्द्र प्रसाद बिमल

संस्थापक अध्यक्ष

उच्चकोटिक ग्रन्थावलीक सृजन, गंभीर गवेषणा, कालातीत प्रकाशन आ लक्षित क्षेत्रसँ सम्वद्ध विविधायामी आयोजन, प्राज्ञिक माध्यमेँ मैथिलीभाषा, वाङ्मय, कला, संस्कृतिक सर्वाङ्गीण उन्नयनक हेतु मैथिली विकास कोष, जनकपुरधाम अपन अथक उद्यम आ कोटि–कोटि मैथिलक अपनत्व तथा सक्रिय सहयोगक वलेँ इतिहासक एक गोट गौरवोज्जवल श्रृंखला निर्मित करबामे सक्षम होइत आएल अछि । संस्थाक स्वनामधन्य अध्यक्ष जीवनाथ चौधरी आ हुनक सहयोगी लोकनिक सामूहिक आ समर्पित नेतृत्वशक्तिक कारण ई संस्था विश्वासक संग मिथिला मैथिलीक अधिकार स्थापना एकर महान सभ्यता,संस्कृति, दर्शन, कला आदिक वर्तमान विराट विश्व सम्पदाक चूड़ान्त शिखर धरि पहुँचएबालए एँरी–चोटीक-पसेना एक कएने अछि से विश्वास दिआबैत अछि जे सम्पूर्ण मिथिलाक उर्जासँ ओजस्वित होइत मिथिला आ मैथिलीकेँ ओहि गरिमासँ अभिमण्डित करबामे सफल होएत जकर ई अधिकारी होइतहुँ वंचित रहल अछि । हम एहि संस्थाक संग ठाढ़ छी आ अपने लोकनिसँ एहि अभियानमे अविलम्ब आवद्ध भए निर्दिष्ट लक्ष्य प्राप्तीमे योगदान देबाक अनुरोध करैत छी । संस्थाक उज्जवल भविष्यक मंगलकामना ।

रमेश रञ्जन झा

संरक्षक/संस्थापक सदस्य सचिव

स्वतन्त्रताक परिभाषित करबाक क्रममे विद्वान लोकनि भाषिक स्वतन्त्रताक बात प्रमुखताक संग उठबैत छथि । एहि विचारक केन्द्रमे मातृभाषा अछि । स्वतन्त्रता आ परतन्त्रता बीचक अन्तर एकटा मिहिन रेखाद्वारा होइत छै । हमसभ ओहि रेखाकेँ चिन्हित करबामे धोखा खाइत रहलहुँ अछि तें सहजतासँ हमरा लोनिकपर कोनो वाह्य सैनिक आ भाषिक आक्रान्ता नियन्त्रण करैत रहल ।
ई प्रमाणित तथ्य छै जे ज्ञान आर्जनक माध्यम मातृभाषा होइक त बिनु मातृभाषाक माध्यमसँ ज्ञान आर्जन कएनिहार प्रतिस्पर्धा नइ क’ सकैए । मिथिलाबासी मैथिलीभाषी एखन ओहने अवस्थामे अछि । ज्ञान–विज्ञानक ई भूमि ओजहीन भेल जा रहल अछि । जे संसारकेँ अपन ज्ञानसँ चमत्कृत कएने छल ओ एखन सभसँ बेसी अशीक्षितक भूमि बनि गेल अछि । प्रतिस्पर्धाक मनोबल आ क्षमतामे ह्रास आबि गेल छै । समय दूर बहुत दूर निकलल जा रहल छै ।
पता नइ कोना ने कोना बि.सं. २०५४ सालमे हम जिल्ला विकास समिति धनुषाक सदस्य पदमे चुनाव लड़लहुँ आ निर्वाचित भेलहुँ । स्थानीय स्वायत्त शासन ऐन लागु भ’ चुकल रहै । हमरा सभक जननिर्वाचित ओ समूह जे कि मुख्य रुपमे नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी एमाले आ नेपाली काँग्रेससँ सम्वद्ध छल तकर स्पष्ट मान्यता छलै जे कानूनी अधिकारक प्रयोगमे हिचकिचाहट नइँ होएबक चाही । स्वायत्त शासन ऐनक प्रावधान अनुसार हमसभ धनुषा जिल्लाक बहुसंख्यक नागरीकक भाषा मैथिलीकेँ सेहो कामकाजक भाषाक रुपमे प्रयोग करबाक निर्णय केलियै । जिल्ला विकास समिति आ फेर जिल्ला विकास परिषद् जकर सदस्य एक सय एक गाबिसकेँ अध्यक्ष आ उपाध्यक्ष होइत छलै, सर्वसम्मतिसँ निर्णय कएल गेलै । मुदा सर्वाेच्च अदालतमे एकटा  निषेधाज्ञा मुद्दा देल गेलै जे नेपालक संविधान विरोधी ई निर्णय छै आ तें खारेज कएल जाए । खारेज भ’ गेलै । तात्कालीन अवस्थामे काठमाण्डौं नगरपालिका, जिल्ला विकास समिति धनुषा, जनकपुर नगरपालिका, राजविराज नगरपािलका आ किर्तिपुर नगरपालिका एहन निर्णय कएने छल । सर्वाेच्च अदलतमे जिल्ला विकास समिति धनुषा आ काठमाण्डौ नगरपािलका मात्र वारेश सहित मुकदमा लडने छल, हमर सौभाग्य जिबिस धनुषाक वारेशक रुपमे हम प्रत्यक्ष रुपें ओ मुद्दा लड़लहुँ । हराओल गेलै । स्वायत्त शासन ऐनद्वारा प्रदत अधिकारक हत्या भेलै । नेपालक मातृभाषी ओहि दिनके एखनो काला दिनकेँ रुपमे स्मरण करैत आएल अछि ।
एहि निराशाक अवस्थासँ बाहर निकलबाक हेतु मैथिली विकास कोषक स्थापना कएल गेलै । हमरे संयोजकत्व गठित समिति एहि संस्थाक विधान आ आर्थिक श्रोतक आधार निर्माण कएने छल । जिबिसकेँ आर्थिक सहयोगमे स्वतन्त्र संस्थाक कानूनी प्रक्रिया पूरा क’ कोषक स्थापना कएल गेलै । स्थापनकालीन समितिक चयन सेहो जिबिस धनुषा कएने छल ।
किछु अवरोध आ गत्यारोध बाद ई कोष अत्यन्त सक्षमताक संग आगु बढि़रहल अछि । मैथिलीक नेतृत्वदायी संस्थाक रुपमे कोष परिचय बनौलक अछि । जिल्लासँ राष्ट्र आ राष्ट्रसँ अन्तराष्ट्रिय स्तर धरि अपन आ अपना मातृभाषाक बिस्तारमे कोष सफल भेल अछि । निश्चित रुपें एखनुक अध्यक्ष जीवनाथ चौधरी आ हुनक कार्यसमितिक ई श्रेय जाइत छन्हि । हम तात्कालीन जिबिस सभापति रामचरित्र साह सहित सम्पूर्ण पदाधिकारीप्रति आभार व्यक्त करैत छी जे तात्कालीन अवस्थामे अपन मातृभाषा, मातृसंस्कृतिक लेल एतेक गम्भिरता देखौलनि । नेपालक जननिर्वाचित निकाय एखनोधरि भाषा संस्कृतिक बिषयमे संवेदनशीलताक नइ देखा पाबि रहलअछि । जखन की एखन संवैधानिक अधिकार स्थानीय तहमे छै आ कोनो न्यायालय ओहि निर्णयपर नियन्त्रण नइ क’ सकै छै । अन्तमे एहि कार्यक सम्पादनमे सहयोग कएनिहार सभप्रति आभार ।

राम भरोस कापडि ‘भ्रमर‘

संस्थापक सदस्य

शुभकामना सन्देश
मैथिलीके बरक्कतिमे अगुवा मैथिली विकास कोष
वि. स. २०५७ सालमे जहिया मैथिली विकास कोषक स्थापना भेल रहै हमहुँँ ओहि कार्य समितिमे एकटा सदस्य रुपमे रहलहुँ । तएँ प्राय हमरो एकर संस्थापक सदस्य कहल जाइत अछि । नीक लगैए… चलु एकटा नीक काजमे थोड बहुत हमरो योगदान त अछिए । 

दू दशक बीति गेलै । विभिन्न आरोह अबरोहकें भोगैत अन्ततः एकर नेतृत्व मैथिली प्रेमी जीवनाथ चौधरीके हाथमे आएल । आ विगत कार्य समितिक छुअए – अनछुअ, विगडल – सम्हारल सम्पूर्ण दुरुस्त करैत मैथिली विकास कोष के एकटा सक्रिय आ भाषा, साहित्य, कला आ सांस्कृति प्रति समर्पित संस्थाक रुपमे स्थापित कएलनि । अपन अवधिमे अनेको महत्वपूर्ण आयोजन क’ भाषा, साहित्य, कलाक रुप पदापर राष्ट्रीय – अन्तराष्ट्रीय स्तरक गोपी आयोजना आदिक एकर स्तरकें आर उचाई पर पहुचाओल गेल । आ एकर सम्पूर्ण श्रेय जीवनाथ चौधरीके जाइत छन्हि । तै ओ धन्यवादके पात्र त छथिहै , उनकर लगनशीलता भाषा प्रेम प्रति हुनक प्रतिबद्धताके सेहो सराहल जएबाक चाहि ।

नेपालमे जाहि तरहें मातृभाषा मैथिलीक अवस्था रहलेक अछि ओ आब आर मजबुत भ क आगा आओत सेल गैत त अछि, मुदा जाहि तरहें एहि समृद्धिशाली भाषाके कमजोर करबाक हेतु किछु राजनीतिक चितंन आ जातिवादी व्यक्तिवादि प्रवृति बढैत देखल जा रहल अछि , ताहि पर समस्त मैथिलकें सतर्क हएब जरुरी छैक । आ एहि काज मे मैथिली विकास कोष अग्रणि भूमिका खेलत से आशा करैत छि ।
अगामी वर्षमे नेपालमे जनगणना शुरु भ रहल छैक । मैथिली भाषी क्षेत्रमे मातृभाषा ल क किछु भए छिटल जा रहलैक अछि, आ किछु विभेदपूर्ण भाषायी कृयाकलाप कारणे इ भ्रम छिटब सेहो आसान भ रहल कठिन अवस्थामे कोषँ अगामी दिनमे मैथिली भाषी क्षेत्रमे अभियानक रुपमे कार्यकर्ता, भाषाप्रेमी रुपमे परिचालन क सभ भ्रम आ एकाधिकारक दमन कें चिरैत मैथिली परापूर्व स बजैत आबि रहल एहि क्षेत्रमे रहनिहार सभक भाषा निक से भावनाकें चित्त भर क बुझएब जरुरी भगेल छैक । एहि कठिन आ अनिवार्य जनचेतना अभियानमे मैथिली विकास कोष पूर्ण रुपेण सफल रहत से हमर विश्वास अछि ।
अन्तमे कोष अपन स्वतन्त्र ………. प्राभि क रहल ल्यबाक एहि सुखद दागमे एहि पृष्टक माध्यम स एकर विस्तृत प्रगतिक जानकारी वैश्विक धा…… पर आर सहज रुपें बुझल, गुनल जाएत से आशा करैत छी । मैथिली विकास कोषक समस्त कार्य समिति, शुभेच्छुक लोकनि प्रति एहि अवसर पर हार्दिक शुभकामना व्यक्त करैत छी ।

श्याम सुन्दर शशी

सदस्य सचिब

मैथिली देशमे दोसर सभस“ अधिक नागरिकके मातृभाषा अछि आ प्रदेश २ मे रहनिहार आधास“ अधिक लोक मातृभाषाक रुपमे मैथिली बजैत छथि । दुनियाक सभस“ कोमल, मधुर आ रागात्मक मानल जाइत अछि ई भाषा । गौरवके विषय ईहो जे मैथिली भारोपेली भाषा समूह अन्तर्गतके आधुनिक भाषामध्य सभस“ पुरान भाषा अछि । सिम्रोनगढके कर्णाटवंशीय शासनकालमे सन् १३२४ मे ज्योतिरीश्वर वर्ण रत्नाकर नामक गद्य ग्रन्थ लिखने छलाह । भाषाशास्त्रीलोकनि एहि ग्रद्य ग्रन्थके भारोपेली भाषा समूहक आधुनिक भाषामध्य पहिल मानैत छथि । मुदा सात सय वर्षक स्वर्णीम तथा अटूट इतिहास रहल मैथिली भाषा, साहित्य, कला, संस्कृतिक एखनहु“ उपेक्षित अछि । नेपालक संविधान नेपालीके राष्ट्रभाषा आ मैथिलीसहितक अन्यसभ भाषाके राष्ट्रिय भाषाक क्षेत्रीमे सूचिकृत क’ भाषाविभेद कएने अछि । प्रदेश २ क आधास“ अधिक व्यक्तिद्वारा बाजलजायबला मैथिली भाषा प्रदेशक कामकाजक भाषा पर्यन्त नहि बनि पाओल अछि । पहिचान आ सामथ्र्यक आधारपर प्रादेशिक संरचना निर्माण करबाक संकल्प राजनीतिक दलसभ कएने छल मुदा संघीय प्रदेशसभक संरचना करैतकाल पहिचानके नजरअन्दाज कएल गेल । भाषा,संस्कृति पहिचानक प्रमुख आधार मानल जाइत अछि मुदा प्रदेश २ के प्रदेश सभासदस्यलोकनि ताहि सिद्धान्तके स्वीकार करबाक स्थितीमे नहि छथि । यदि रहितथि त कोशीस“ गण्डकी आ चूरे पर्वत श्रृंखलास“ दक्षिणी सीमाधरि पसरल मैथिली भाषीबहुल एहि प्रदेशके नाम मिथिला,जानकी,जनक किंवा जनक–जानकीक पहिचानस“ सम्बद्ध अन्य कोनो नाम रखबामे हर्ज कि ?
संघीय सरकार नेपाली भाषाके सरकारी कामकाजक भाषा घोषणा कएने अछि । प्रदेश सरकार स्पष्ट भाषा निती नहि बना सकल अछि । कहि त प्रदेश सरकारक हर्ता कर्तालोकनिमे सांस्कृतिक चेतनाक आभाव देखल जा रहल अछि । एहनास्थितीमे मैथिली विकास कोष,मिथिला नाट्यकला परिषद्,रमानन्द युवा क्लव तथा राजविराजके मैथिली साहित्य परिषदसहित संघ संस्थासभक भूमिक आओर अधिक बढि जाइत अछि । मैथिली भाषा,साहित्य,कला,संस्कृतिक सम्बर्धन , संरक्षण तथा मिथिला प्रदेश नामाकरण अभियानसहितक भाषीक,सांस्कृतिक अभियानमे लागल मैथिली विकास कोष सम्प्रति वेभसाईट निर्माण क रहल अछि । जाहि मार्फत कोषद्वारा कएल गेल काम–कार्यवाही संगहि अगामी योजनासभके सार्वजनिक करबाक योजना बनौने अछि । कोषक स्थापना तत्कालीन जिल्ला विकास समिति धनुषाद्वारा कएल गेल छल । सम्प्रति जिविसके संरचना समाप्त कएल गेल अछि । अर्थात् कोष अभिभावकविहीन बनल अछि । तथापि प्रदेश सरकार , स्थानीय सरकार तथा मैथिलीप्रेमी जनप्रतिनिधीसभक सहयोगस“ कोषक गतिविधि निरन्तर संचालित अछि । दू दू बेर अन्तरराष्ट्रिय स्तरके जनकपुर साहित्य–कला एवं नाटक महोत्सवके आयोजन क’ चुकल अछि । प्रत्येक वर्ष दू गोट स्रष्टाके पुरष्कार वितरण करैत अछि । विभिन्न स्रष्टाके करीव एक दर्जन पुस्तक प्रकाशन क’ चुकल अछि आ विभिन्न विषयपर वहस,छलफल तथा सेमिनारसभक आयोजन सेहो करैत आएल अछि । अपनेसभक राय सल्लाह आ सहयोगक अपेक्षा अछि ।