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नेपालक मैथिली साहित्य, कला, संस्कृति आ मैथिली भाषा आन्दोलनमे उच्च योगदान कएनिहार व्यक्तित्वकेँ पुरस्कृत करबाक हेतु आधुनिक मैथिली सहित्यक विजी पुरुष डा. धीरेश्वर झा धीरेन्द्रक नामपर डा. घीरेन्द्र साहित्य संस्कृति पुरष्कार आ मिथिलाक सांस्कृतिक प्रतिक सलहेशक नामसँ सलहेस सांस्कृतिक पुरष्कारक घोषणा कएल गेल । एहि दुनू पुरष्कारसँ एखनधरि एक दर्जनसँ बेसी स्रष्टालोकनि पुरष्कृत भ’ चुकल छथि ।

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साहित्य कला तथा नाटक महोत्सब

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हमरा सभक बिषयमे

जिल्ला विकास समिति, नेपाल सरकारक स्थानीय ऐन अनुसार जिल्ला सरकारक रुपमे कार्य करबाक हेतु स्थापित निकाय छल । मुख्यतः विकास निमार्ण कार्यक नेतृत्वदायी भूमिकासंगे ऐनक प्राव्धान अनुसार स्थानीय भाषाक संरक्षण, सम्बर्धन आ प्रयोगक अधिकार सेहो प्रदत छलै । जाहि क्रममे काठमाण्डौं नगरपालिका अपन कामकाजक भाषाक रुपमे नेपाल भाषके मान्यता देने छलै । जिल्ला विकास समिति धनुषामे सेहो एहि विषयमे बहश प्रारम्भ भेलै आ अन्ततः जिबिस धनुषाक बोर्डक निर्णय पश्चात परिषद बैठकद्वारा एहि जिल्लाक अधिंकाश नागरिकक भाषा मैथिलीकेँ जिल्ला भाषाक रुपमे मान्यताकसंगे आमजनताद्वारा नेपाली भाषासंगे मैथिली भाषाक प्रयोगकेँ मान्यताक प्रस्ताव सर्वसम्मत पारीत कएल गेलै । एहि प्रभावसँ जनकपुर नगरपालिका आ राजविराज नगरपालिका मैथिली भाषाकेँ आ किर्तीपुर नगरपालिका नेपाल भाषाकेँ मान्यता प्रदान कएने छल । नेपालक मातृभाषी सभमे एकप्रकार सकारात्मक प्रभाव प्रक्षेपण भेल छलै । मुदा कानून प्रदत एहि अधिकारक प्रयोगक विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालयमे रोक लगएबाक याचिका दायर कएल गेल, सर्वाेच्च अदालत आदेश देलकै जे तात्काल एहि भाषा सभक प्रयोग बन्द कएल जाए । जिल्ला विकास समिति धनुषा आ काठमाण्डौं नगरपालिका मात्र एहि मुद्दाकेँ निरन्तर लडैत रहल ।

जिबनाथ चौधरी

अध्यक्ष

मैथिली विकास कोष जनकपुरधाम मैथिली भाषा, साहित्य, संस्कृतिक विकास, संरक्षण आ सम्वर्धनक हेतु स्थापनाकालहिंसँ सक्रियताकसंग क्रियाशील अछि । अपन मातृभाषाक संवैधानिक मान्यताक हेतु राजनीतिक आन्दोलन, भाषाभाषीक संग सहकार्य आ एहि भाषाक लेखक–कलाकारसंगक प्रत्यक्ष सहकार्यसँ कोष अपन लक्ष्य प्राप्तिक दिशामे निरन्तर डेग बढ़ारहल अछि । संस्था स्थापनाक बाद मातृभाषापर होइत आएल राजनीतिक प्रहारक विरुद्ध एकजुटताक प्रर्दशन करैत मैथिली मातृभाषी सभक अपन भाषाप्रतिक सम्मान आ सहज राग अनुरागकेँ जागृत कर’मे कोष प्रयत्नरत रहैत आएल अछि । ताहि कारणे कतेको राजनीतिक शक्तिक आक्रमणक बादो भाषिक गतिविधि आ मैथिली आन्दोलन विचलनक अवस्थामे नइ आएल अछि ।
विगत बर्षमे लेखक–कलाकारसभसँ सम्बन्धकेँ प्रगाढ़ बनएबाक उदेश्यसँ साहित्यिक आ सांस्कृतिक कार्यक्रम सभकेँ आओर सघन बनाओल गेल । गोष्ठी, सेमिनारसन नियमित कार्यक्रमसंगे अन्तरराष्ट्रिय स्तरक साहित्य कला महोत्सवक आयोजन कएल गेल । मैथिली आ जनकपुर एहि आयोजनसँ अन्तरराष्ट्रिय महत्व पओलक अछि । नेपालक मैथिलीमे गैरसरकारी क्षेत्रक सभसँ पैघ राशीक पुरस्कार स्थापना कोषद्वारा कएल गेल । कोष मानैत अछि जे मैथिली भाषा लोकक बीचमे जीवित आ संरक्षित अछि । मिथिलाक लोकजीवनक नायक सलहेश अछि । लोक आ लोकसंस्कृति, कला, साहित्यप्रति सम्मान प्रकट करबाक हेतु “सलहेश सांस्कृतिक पुरस्कार” स्थापना कएल गेल । कोनो समाजक विचार आ संस्कारमे स्थुलता नइँ अएबाक चाही । समाजक गति प्रवाहमान होइत छैक । नेपालक मिथिलाक समाजक गति आ तीव्रता मापन करैत आधुनिक चेत आ भाववोध देनिहार, साहित्यकेँ जनमुखी बनौनिहार आ साहित्यकार आ कलाकर्मीक पिढ़ी निमार्ण कएनिहार नेपाल मैथिली साहित्य–कलाक परिकल्पक डा. धीरेश्वर झा धीरेन्द्रक नामसँ सेहो “डा. धीरेन्द्र साहित्य संस्कृति पुरस्कार” सम्मानक स्थापना कएल गेल ।
कोष बि.सं.२०५८सालसँ एखनधरिक यात्राक सम्पूर्ण अग्रज आ सहकर्मी लोकनिक निष्ठा आ प्रतिबद्धताक कारण सहजतासंग अपना मार्गमे निर्वाध यात्रा क’ रहल अछि । स्थापना कालक कार्यसमितिक बादहि हमरा नेतृत्व प्रदान कएनिहार सम्पूर्ण सदस्य लोकनिकप्रति आभार व्यक्त करैत छी । एखनधरिक कार्यकालक सम्पूर्ण सहकर्मी आ सदस्य लोकनिक साकारात्मक सहयोग आ नेतृत्वप्रतिक विश्वास कोषक सम्बल अछि । हम एहि कोषक परिकल्पना क’ संस्थागत स्वरुप देनिहार तात्कालीन जिल्ला विकास समिति धनुषाक सम्पूर्ण पदाधिकारी, संस्थाक स्थापनाकालीन पदाधिकारी सदस्य तथा संरक्षक लोकनिक प्रति आभार व्यक्त करैत छी । अन्तमे वेभ साइट निर्माणमे अजित मिश्र आ संपादनमे श्री रमेश रञ्जन झा आ कोषक सदस्य सचिव श्री श्याम सुन्दर शशि सहित सम्पूर्ण कार्य समिति प्रति आभार । जय मिथिला जय मैथिली

उदेश्य

  • मैथिली भाषा, साहित्य, संस्कृतिक उन्नयन, संरक्षण, प्रर्वधन ।
  • मैथिली वाङ्मय, ईतिहास, पुरातत्व, लोककला, लोकनायकसभपर अनुसन्धान, प्रकाशन आ प्रशारणक हेतु सामग्री निमार्ण ।
  • मैथिली नाटक, गीत, सङ्गीत, नृत्य, तथा अन्य प्रर्दशनकारी कलाक संरक्षण, प्रर्वधन ।
  • भाषिक सम्वैधानिक अधिकार, मिथिलाक भूगोल, ईतिहास आ लोकपरम्पराक रक्षाक हेतु सतत् प्रयत्नशील ।

किछु झलक

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