मैथिली विकास कोष
स्थापनाक औचित्य
जिल्ला विकास समिति, नेपाल सरकारक स्थानीय ऐन अनुसार जिल्ला सरकारक रुपमे कार्य करबाक हेतु स्थापित निकाय छल । मुख्यतः विकास निमार्ण कार्यक नेतृत्वदायी भूमिकासंगे ऐनक प्राव्धान अनुसार स्थानीय भाषाक संरक्षण, सम्बर्धन आ प्रयोगक अधिकार सेहो प्रदत छलै । नेपालमे भाषिक अधिकारक स्वर घनीभूत भ’ रहल अवस्था छलै । जाहिक्रममे काठमाण्डौं नगरपालिका अपन कामकाजक भाषाक रुपमे नेपाल भाषाके मान्यता देने छलै । जिल्ला विकास समिति धनुषामे सेहो एहि विषयमे बहश प्रारम्भ भेलै आ अन्ततः जिबिस धनुषाक बोर्डक निर्णय पश्चात परिषद बैठकद्वारा एहि जिल्लाक अधिंकाश नागरिकक भाषा मैथिलीकेँ जिल्ला भाषाक रुपमे मान्यताकसंगे आमजनताद्वारा नेपाली भाषासंगे मैथिली भाषाक प्रयोगकेँ मान्यताक प्रस्ताव सर्वसम्मत पारीत कएल गेलै । एहि प्रभावसँ जनकपुर नगरपालिका आ राजविराज नगरपालिका मैथिली भाषाकेँ आ किर्तीपुर नगरपालिका नेपाल भाषाकेँ मान्यता प्रदान कएने छल । नेपालक मातृभाषी सभमे एकप्रकार सकारात्मक प्रभाव प्रक्षेपण भेल छलै । मुदा कानून प्रदत एहि अधिकारक प्रयोगक विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालयमे रोक लगएबाक याचिका दायर कएल गेल, सर्वाेच्च अदालत आदेश देलकै जे तात्काल एहि भाषा सभक प्रयोग बन्द कएल जाए । जिल्ला विकास समिति धनुषा आ काठमाण्डौं नगरपालिका मात्र एहि मुद्दाकेँ निरन्तर लडैत रहल । जिबिस धनुषाक वारेसक रुपमे रमेश रञ्जन अधिकृत नियुक्त कएल गेल छलाह । सर्वाेच्चक निर्णयसँ स्थानीय सरकारद्वारा कएल गेल निर्णय बदर भेलै आ कानूनी अधिकार प्रयोगपर प्रतिवन्ध लगा देल गेलै । एखनोधरि नेपालक मातृभाषी लोकनि ओहिदिनकेँ काला दिनक रुपमे विरोध प्रर्दशन करैत आबिरहल अछि ।
जिल्ला विकास समिति धनुषा तहिएसँ भाषाक बिषयमे गम्भिर मन्थनमे लागि गेल । संस्था स्थापनाक माध्यमसँ भाषिक अधिकारक आन्दोलनकेँ निरन्तरता देबाक निष्कर्षपर पहुँचल । एकटा वैधानिक संस्थाक स्थापनाक प्रयत्न आगू बढल ।




